यह एक सुंदर कहानी है जो हमें न्याय और ईमानदारी का मतलब सिखाती है। 'न्याय की कुर्सी' वह जगह है जहाँ बैठकर कोई सच्चाई के आधार पर सही फैसला करता है — बिना किसी का पक्ष लिए। इस पाठ में हम सीखेंगे कहानी का मुख्य विचार और उसकी सीख, और साथ ही कहानी पढ़ने का कौशल — पात्र, घटनाक्रम और विलोम शब्द। मूल कहानी यहाँ नहीं दी गई; हम सिर्फ़ उसके पीछे के भाव और कौशल को अपने उदाहरणों से समझेंगे। नीचे किसी शब्द पर टैप करके अर्थ देखिए।
तनिक खेलिए
इस कहानी से जुड़े कुछ ख़ास शब्द और भाव नीचे हैं। किसी पर टैप कीजिए और उसका अर्थ देखिए — न्याय, ईमानदारी, पात्र, घटनाक्रम, सीख और विलोम शब्द।
सीखिए
हल किया उदाहरण। छोटी कहानी: "रवि को मैदान में ₹100 का नोट मिला। उसने सोचा यह किसी का गिरा होगा, और सीधे शिक्षक को दे दिया। शिक्षक ने उसकी ईमानदारी की प्रशंसा की।"
पात्र — रवि और शिक्षक।
घटनाक्रम — नोट मिला → रवि ने सोचा → शिक्षक को लौटाया → प्रशंसा मिली।
सीख — ईमानदारी से किया काम हमेशा सराहा जाता है।
यह कहाँ काम आता है
जब दो दोस्तों में झगड़ा हो, तो अच्छा फैसला वह होता है जो दोनों की बात सुनकर किया जाए — किसी एक का पक्ष लेकर नहीं। खेल में भी निष्पक्ष होना (बेईमानी न करना) न्याय का ही रूप है।
किसी की गिरी हुई चीज़ लौटाना, गलती होने पर सच बोल देना, परीक्षा में नकल न करना — ये छोटी-छोटी ईमानदारी ही बड़ा चरित्र बनाती है। कहानी यही सीख जीवन से जोड़ती है।
स्वयं जाँचिए
अर्थ, भाव, शब्दार्थ और मुख्य विचार पर आधारित सरल प्रश्न — ये जाँचते हैं कि आप कहानी को कितना समझ पाए, सिर्फ़ याद नहीं।
सभी उदाहरण मौलिक हैं। कहानी न्याय की कुर्सी NCERT कक्षा 5 हिंदी पुस्तक वीणा में है (ncert.nic.in); उसका मूल पाठ यहाँ नहीं दोहराया गया।
Buffyyour study buddyBuffy एक AI सहायक है और गलत हो सकती है — अपनी NCERT पुस्तक अवश्य देखें।