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कक्षा 5/ हिंदी/ मेरा बचपन
पाठ 7 · NCERT कक्षा 5 वीणा

मेरा बचपन

हर किसी के पास बचपन की कुछ प्यारी यादें होती हैं — कोई खेल, कोई आँगन, किसी की रसोई की महक। जब लेखक अपनी ऐसी सच्ची यादें अपने शब्दों में लिखता है, तो वह संस्मरण कहलाता है। इस पाठ में हम सीखेंगे कि अपनी यादों को इंद्रियों (देखना, सुनना, सूँघना, छूना, स्वाद) के सहारे कैसे सजीव बनाएँ और उनमें भाव कैसे भरें। नीचे के सभी उदाहरण मौलिक हैं; हम सिर्फ़ पाठ का नाम लेते हैं। हर शब्द को छूकर उसका अर्थ देखो।

👥 3 विषय⏱ ~20 मिनट📝 10 प्रश्न
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तनिक खेलिए

संस्मरण की भाषा

संस्मरण लिखने के कुछ औज़ार होते हैं। हर शब्द को छूकर देखो कि उसका क्या अर्थ है और यादों, वर्णन तथा भावों के विचार आपस में कैसे जुड़ते हैं।

एक्सप्लोर · संस्मरण के औज़ारकिसी शब्द को छुओ

सीखिए

तीन बड़े विचार

  • संस्मरण — लेखक के बीते जीवन की सच्ची यादों का लेखन। यह कहानी की तरह दिखता है, पर होता असली अनुभव है।
  • “मैं” की आवाज़ — संस्मरण प्रायः उत्तम पुरुष में होता है, क्योंकि लेखक अपनी ही बात बताता है — “मुझे याद है, जब मैं छोटा था…”
  • सच्चाई — संस्मरण में बातें मनगढ़ंत नहीं होतीं; वे सचमुच घटी होती हैं, इसलिए वे हमारे दिल को छू जाती हैं।
  • क्यों लिखें — अपनी यादें लिखकर हम उन्हें हमेशा के लिए सँजो लेते हैं, और दूसरे भी हमारी आँखों से वह समय देख पाते हैं।
  • इंद्रिय-अनुभव — हमारी पाँच इंद्रियाँ — आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा — से मिली बातें लिखने पर वर्णन सजीव हो उठता है।
  • सपाट बनाम सजीव“आम मीठा था” सपाट है; “पका आम इतना रसीला था कि रस उँगलियों से टपकने लगा” — सजीव है।
  • छोटी-छोटी बातें — किसी आँगन की धूप, चूल्हे का धुआँ, बारिश की मिट्टी की सोंधी गंध — ये नन्ही बातें ही याद को असली बनाती हैं।

उदाहरण से समझें। इस वाक्य में कौन-कौन सी इंद्रियाँ छू रही हैं? “गर्मी की दोपहर में नीम की ठंडी छाँव और कोयल की मीठी कूक मन मोह लेती थी।”

नीम की छाँव — आँख से दिखती है (देखना)।

ठंडी — त्वचा महसूस करती है (छूना/स्पर्श)।

कोयल की कूक — कान सुनते हैं (सुनना)।

एक ही छोटे वाक्य में तीन इंद्रियाँ — इसीलिए वह दृश्य आँखों के सामने जीवित हो उठता है।

आम भूल: सिर्फ़ “अच्छा”, “सुंदर”, “मज़ेदार” जैसे शब्द लिख देने से वर्णन सजीव नहीं होता। पाठक को बताओ कि क्या दिखा, क्या सुना, क्या महक आई — तभी वह तुम्हारी याद को महसूस कर पाएगा।
  • समय-क्रम — घटनाओं को जैसे-जैसे वे घटीं उसी सिलसिले में लिखो — पहले क्या, फिर क्या, अंत में क्या। इससे पाठक भटकता नहीं।
  • जोड़ने वाले शब्दपहले, फिर, उसके बाद, आख़िर में, उन दिनों — ये शब्द यादों को मनके की तरह एक धागे में पिरो देते हैं।
  • भाव — हर याद के साथ कोई न कोई भावना जुड़ी होती है — खुशी, डर, गर्व, उदासी। उस भाव को लिखोगे तो याद और गहरी लगेगी।
  • अंत में — संस्मरण के अंत में लेखक अक्सर बताता है कि वह याद आज भी उसे क्यों प्यारी है — यही उसका दिल होता है।

यह कहाँ काम आता है

संस्मरण, जीवन में

अपनी डायरी और कहानी

जब तुम अपनी छुट्टियों, किसी त्योहार या खास दिन के बारे में डायरी या निबंध लिखते हो, तो असल में संस्मरण ही लिख रहे होते हो। इंद्रिय-वर्णन और भाव डालते ही तुम्हारा लेखन सबसे अलग और जीवंत बन जाता है।

बड़ों की यादें सुनना

दादी-नानी जब अपने बचपन के किस्से सुनाते हैं, तो वे मौखिक संस्मरण होते हैं। ध्यान से सुनोगे तो उनमें भी क्रम, वर्णन और भाव छिपे मिलेंगे — और परिवार की पुरानी बातें सँभल जाएँगी।

पत्र और संदेश

दूर रहते दोस्त या रिश्तेदार को पत्र लिखते समय अपनी कोई याद सजीव वर्णन के साथ साझा करोगे, तो वे भी वह पल महसूस कर पाएँगे — यही संस्मरण की ताक़त है।

स्वयं जाँचें

स्वमूल्यांकन प्रश्नोत्तरी

योग्यता-आधारित प्रश्न — अधिकतर बहुविकल्पीय, साथ में कथन–कारण और एक छोटा प्रसंग — जो शब्दार्थ, भाव और मुख्य विचार को समझकर इस्तेमाल करने की परख करते हैं।

अंक 0/10

अभ्यास के सभी उदाहरण मौलिक हैं। पाठ “मेरा बचपन” (NCERT वीणा) का केवल नाम लिया गया है, मूल पाठ नहीं दोहराया गया।

BuffyBuffyyour study buddy
Buffy
नमस्ते! मुझसे पूछो कि संस्मरण क्या होता है, इंद्रियों से सजीव वर्णन कैसे करें, समय-क्रम और भाव कैसे डालें, या किसी शब्द का अर्थ। मैं अपने मौलिक उदाहरणों से समझाऊँगी।

Buffy एक AI सहायक है और गलत हो सकती है — अपनी NCERT पुस्तक अवश्य देखें।

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