यह एक प्यारी-सी कविता है जो सुबह की पहली किरन के बारे में बात करती है। जब सूरज उगता है, तो उसकी सुनहरी किरन चारों ओर फैल जाती है, पंछी चहक उठते हैं और मन में उल्लास भर जाता है। इस पाठ में हम सीखेंगे कविता का अर्थ और मुख्य भाव, और देखेंगे कि कवि कैसे शब्दों से प्रकृति का सुंदर चित्र बनाता है। मूल कविता यहाँ नहीं दी गई — हम सिर्फ़ उसके पीछे का भाव और भाषा अपने उदाहरणों से समझेंगे। नीचे किसी शब्द पर टैप करके उसका अर्थ देखिए।
तनिक खेलिए
इस कविता के कुछ ख़ास शब्द और भाव नीचे दिए हैं। किसी पर टैप कीजिए और देखिए उसका अर्थ — किरन, भोर, प्रकृति, उल्लास, और कविता की भाषा के दो साथी: तुक और विशेषण।
सीखिए
हल किया उदाहरण। नीचे दी पंक्ति में प्रकृति का चित्र खोजिए: "भोर हुई, सुनहरी किरन ने ओस की बूँदों को चमका दिया।"
भोर हुई — समय बताया: यह सुबह की बात है।
सुनहरी किरन — रंग का चित्र: धूप सोने जैसी दिख रही है।
ओस की बूँदें चमक उठीं — दृश्य पूरा हुआ: पत्तों पर पानी की नन्ही बूँदें धूप में मोती-सी चमक रही हैं।
यह कहाँ काम आता है
अगली बार सुबह जल्दी उठकर बाहर देखिए — पूरब की ओर सूरज की पहली किरन, पत्तों पर ओस, और पंछियों की चहक। कविता पढ़ने के बाद यही दृश्य और भी सुंदर दिखेगा, क्योंकि अब आपके पास उसे कहने के शब्द हैं।
दो-तीन पंक्तियों की अपनी कविता लिखकर देखिए — किसी एक चीज़ चुनिए (बारिश, चाँद, पेड़) और उसके बारे में अपनी भावना लिखिए। चाहें तो अंत में तुक मिला लीजिए और एक-दो विशेषण जोड़िए, जैसे आपने इस पाठ में सीखा।
स्वयं जाँचिए
अर्थ, भाव, शब्दार्थ और मुख्य विचार पर आधारित सरल प्रश्न — ये जाँचते हैं कि आप कविता को कितना समझ पाए, सिर्फ़ याद नहीं।
सभी उदाहरण मौलिक हैं। कविता किरन NCERT कक्षा 5 हिंदी पुस्तक वीणा में है (ncert.nic.in); उसका मूल पाठ यहाँ नहीं दोहराया गया।
Buffyyour study buddyBuffy एक AI सहायक है और गलत हो सकती है — अपनी NCERT पुस्तक अवश्य देखें।