यह एक बहुत ही मज़ेदार कविता है! इसमें कल्पना की गई है कि चाँद भी एक प्यारा-सा कुरता पहनना चाहता है — पर उसका नाप हर रोज़ बदलता रहता है, इसलिए कुरता ठीक से बनता ही नहीं। यह सोचकर ही हँसी आ जाती है! इस पाठ में हम सीखेंगे कल्पना और हास्य का आनंद, और दो काव्य-गुण — मानवीकरण और तुक। मूल कविता यहाँ नहीं दी गई; हम उसका भाव और भाषा अपने उदाहरणों से समझेंगे। नीचे किसी शब्द पर टैप करके अर्थ देखिए।
तनिक खेलिए
इस कविता से जुड़े कुछ ख़ास शब्द और काव्य-गुण नीचे हैं। किसी पर टैप कीजिए और उसका अर्थ देखिए — कल्पना, हास्य, मानवीकरण, तुक, कुरता और विशेषण।
सीखिए
हल किया उदाहरण। बताइए, इनमें मानवीकरण कहाँ है: (क) "हवा चल रही है।" (ख) "हवा पेड़ों से बातें करने लगी।"
(क) — सीधी बात है, कोई मानवीकरण नहीं।
(ख) — हवा 'बातें' नहीं करती; उसे मनुष्य जैसा दिखाया गया — यही मानवीकरण है।
यह कहाँ काम आता है
शाम को बादलों को देखिए — कोई बादल हाथी जैसा, कोई नाव जैसा लगता है। यही कल्पना है। चाँद-तारों और बादलों में आकृतियाँ ढूँढ़ना आपकी कल्पना-शक्ति को तेज़ करता है।
किसी चीज़ को मनुष्य जैसा सोचकर दो मज़ेदार पंक्तियाँ लिखिए — जैसे "बारिश की बूँदें छत पर नाचने लगीं।" अंत में तुक मिला दीजिए, तो आपकी अपनी छोटी हास्य कविता तैयार!
स्वयं जाँचिए
अर्थ, भाव, शब्दार्थ और मुख्य विचार पर आधारित सरल प्रश्न — ये जाँचते हैं कि आप कविता को कितना समझ पाए, सिर्फ़ याद नहीं।
सभी उदाहरण मौलिक हैं। कविता चाँद का कुरता NCERT कक्षा 5 हिंदी पुस्तक वीणा में है (ncert.nic.in); उसका मूल पाठ यहाँ नहीं दोहराया गया।
Buffyyour study buddyBuffy एक AI सहायक है और गलत हो सकती है — अपनी NCERT पुस्तक अवश्य देखें।